मेरा बच्चा बहुत रोता है

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 तो आख़िर कुछ शिशु (छः माह से कम) क्यों अधिक रोते हैं?

चलिए समझते हैं कुछ कारण..

1. शिशु को यदि भूख लगने पर कुछ देर दूध न दिया गया तो वह चिड़चिड़ा जाता है। फिर दूध देने पर भी नहीं पीता और तेज़ तेज़ चिल्लाता जाता है। जिससे आपकी नाक में दम कर सके। 
बच्चे का रोना शायद दुनिया की सबसे तकलीफ़देह आवाज़ जो होती है। सब लग जाते हैं चुप कराने।

"बहू तुझसे एक न पलता हमने छः छः पाल दिए थे। मोबाइल से अलग हो तो कुछ दिखे।"

2. शिशुओं का BMR basal metabolic Rate अधिक होता है।

जिससे उन्हें गर्मी अधिक लगती है। कई बार माएँ, ठंडी लगने के डर से बहुत अधिक टोपे, मोजे, दस्ताने, जैकेट ,रजाई सब उढ़ा कर शिशु को रोबोट या अंतरिक्ष यात्री सा बना देती हैं। गर्मी ,बेचैनी से वह रो उठता है। ऐसे में उसे उढ़ा कर, चिपका कर घुमाने का प्रयास भी व्यर्थ जाता है।

उसके टाइट कपड़े,टोपे कम करके देखें। कुछ ताज़ी हवा में जाएं।

बहुत बार शिशु मुझ तक आते आते चुप हो जाते हैं

माता पिता खुश हो कर कहते हैं "सर आपके पास आते ही ठीक हो जाता है।"

दरअसल वह मेरे पास आने से नहीं बाहर ,हवा में घूमने से चुप और खुश हो जाता है।

लेकिन यह बात मैं उन्हें क्यों बताऊं।

3. कुछ दिन के शिशु  यूरिन होने पर रोते हैं। गीला होने का अहसास वे रो कर ही communicate कर सकते हैं। क्योंकि इस समय वे न तो आवाज़ लगा सकते हैं.. मम्मी आ जाओ.. सू सू आई।

न ही कोई और तरीका है उनके पास

अतः यह एक सामान्य बात है।

4. पेट दर्द:

जो शिशु पूर्णतः माँ के दूध पर होते हैं, (जो कि होना ही चाहिए)
उन्हें कभी कभी आंतों में संकुचन का अहसास होने से हल्का दर्द होता है, जो कि अधिकतर शाम को या रात को होता है। जिसे हम चिकित्सक evening colick कहते हैं।

कंधे पर शिशु को रखने , या पट (पेट के बल) लिटाने पर इसमें राहत मिलती है।

अतः शिशु बहुत रो रहा हो तो  उपरोक्त तीन कारणों को पहले ठीक करके देखें जैसे भूख, गर्मी, गीला होना।

इनसे न चुप हो तब चौथे नंबर का   
कारण .. Evening Colick  हो सकता है।

जिसके लिए कंधे पर रख घुमाएं। या पेट के बल कुछ देर सुलाएँ।

इससे भी ठीक न हो..तो शिशुरोग विशेषज्ञ को मिलें।

रात बिरात हो, डॉक्टर से मिलना संभव न हो तो पेरासिटामोल ड्रॉप्स जो कि अनेकों ब्राण्ड नाम जैसे calpol, crocin drops,T98 इत्यादि के नाम से आती है दें।

कितना देना है?
5 kg का शिशु हो तो 0.5 ml। 
3 kg का हो तो 0.3  ml

मतलब जितना वज़न हो उसके पहले दशमलव लगा लें। 
बाद में अपने चिकित्सक को मिल लें।

एक से दो बार छह छह घंटे में। बाद में चिकित्सक से मिल लें।

5. कान दर्द: 
कान दर्द सर्दी होने, वैक्स, फंगल इन्फेक्शन या बैक्टीरियल इन्फेक्शन से होता है।

रुक रुक कर बच्चा तेज़ रोता है।

क्या करें:

उपरोक्त paracetamol ड्रॉप्स इसमे भी काफी राहत देगा।

आपको समझ न आये पेट दर्द है या कान दर्द तब भी यह काम करेगा। ड्रॉप्स सुरक्षित होते हैं एवं बिना चिकित्सकीय पर्चे के over the counter मिल जाते हैं।

लेकिन कारण की सही जांच के लिए बाद में चिकित्सक को मिल लें।

कान में तेल, दूध कुछ भी न डालें। सिर्फ मीठी लोरी डालें।

दुनिया में इंसान ही एक मात्र प्राणी होगा जिसके कान में कुछ डाला जाता है। रचयिता की आंखें 
भी आश्चर्य से फटी रह जाती होंगी।

6. इन्सेक्ट बाईट.. कभी कभार चीटी वगैरह का काटना रोने की वजह बनेगा। लेकिन इसका निशान शिशु की कोमल त्वचा पर दिखेगा। कुछ देर में दर्द ठीक हो जाएगा।
उपरोक्त paracetamol drops इसमे भी राहत दे सकते हैं।

7. नींद न होना: किसी भी वजह से नींद पूरी न होने पर शिशु चिड़चिड़ा हो सकता है। उसे आराम दें।
जगा जगा कर दूध न पिलाएं। जब स्वयं जागे तभी दूध दें।

जन्म के बाद
आरम्भ के कुछ दिन शिशु 18 से 20 घंटे सोते हैं। उन्हें दिन और रात का भान नहीं होता। दिन में ख़ूब नींद ले लेने पर रात में अधिक रो सकते हैं ध्यान आकर्षित करने। जो कि सामान्य बात है।

इन ड्रॉप्स को ?

आजकल के शिशुओं में नींद कम होती जा रही है। शायद इंसान के इर्द गिर्द इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, टीवी, मोबाइल, लाइट्स इत्यादि के देर रात तक चलने देने की वजह से।

शिशु की नींद कम होने का अर्थ यह नहीं कि हम उन्हें नींद की दवाएं देने लगें। यह मानव मस्तिष्क का अनुकूलन भरा बदलाव है।

8. गंभीर कारण:

शिशु का लगातार चीख चीख कर तीन घंटे से अधिक रोना मस्तिष्क में संक्रमण या meningitis का लक्षण हो सकता है। 

अर्थात ऊपरोक्त सभी उपायों के बावजूद शिशु रोता रहे, दूध न पिए तब चिकित्सक को जल्द मिलें।

पहले सात कारण ही अधिकांशतः होते हैं। सातवां काऱण रेयर है। लेकिन इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता।

9. शिशु का स्वभाव:

हर शिशु का अपना एक व्यक्तित्व होता है। अतः कुछ शिशु अधिक रोने वाले एवं कुछ कम रोने वाले हो सकते हैं। जो कि एक सामान्य बात है। उम्र बढ़ने पर व्यक्तित्व में बदलाव आते रहते हैं।
सास कह सकती है माँ पर गया है, मां कह सकती है सास की छाया है। लेकिन जो भी है यह बदल जायेगा।

बच्चा बहुत रो रहा है,  समस्या अभिभावकों को परेशान करने वाली एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के पास आने वाली सबसे कॉमन समस्याओं में से एक है।

अतः जिनके शिशु हों, या होने वाले हों उन्हें यह लेख गिफ्ट करें। उन्हें मेंशन कर या शेयर कर।

यूट्यूब चैनल Dr Avyacts Health and Happiness पर एक वीडियो इस संबध में आज रात तक अपलोड भी करूँगा, जिससे लोग और भी बेहतर समझ सकें ।

स्वस्थ्य जन 
समृद्ध राष्ट्र

आपका 

डॉ अव्यक्त