वेरीकोज नसों का कारण क्या हैं?

वेरीकोज नसों का कारण क्या हैं?

घरेलू उपचार स्पाइडर नस या वेरिकोस वेंस के इलाज के लिए...
वेरीकोज वेन्स/मकड़ी नस वे नसें होती हैं जो त्वचा की ऊपरी सतह से उभरी हुयी दिखाई देती हैं। 
अधिक दबाव पड़ने के कारण नसों के वाल्व (द्वार) खराब हो जाते हैं जिसकी वजह से ऐसा होता है।
सूजीं, मुड़ीं हुईं और उभरी हुयी ये नसें लाल या नीले रंग की होती हैं जो मुख्य रूप से जाँघों या पिंडलियों में दिखाई देती हैं।

मकड़ी नसों / वेरीकोज वेन के कारण
* ख़राब दिनचर्या और व्यायाम तथा अच्छे खानपान की कमी से भी ये समस्या होती है। 
* घंटो तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक जंक फ़ूड खाना, गर्भावस्था, लम्बे समय तक कब्ज आदि के कारण भी नसों में उभार आ सकता है। 
* भारी वजन उठाने या कठिन अभ्यास करने से भी ये समस्या हो सकती है।
* विटामिन-सी की कमी से आने वाली कमजोरी से भी ऐसा हो सकता है।
* किसी किसी में लीवर की खराबी, ह्रदय रोग और गठिया की वजह से भी ये होता है।
* कई बार ज़्यादा वज़न उठाने और काफी कठोर व्यायाम करने से पैरों पर अत्याधिक दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से इन नसों की उत्पत्ति होती हुई देखी जा सकती है।
* आनुवांशिकता भी एक ऐसा कारण है, जिसकी वजह से वेरिकोज़ नसों की समस्या पैदा हो सकती है।
* ऐसा भी कई बार पाया गया है कि दिल के दौरे, गुर्दे की किसी बीमारी और ट्यूमर (tumour) की वजह से भी शरीर में वेरिकोज़ नसें उत्पन्न हो जाती हैं।
* ज्यादातर लोग इसके बारे में जागरूक न होने के कारण इस पर ध्यान नहीं देते जबकि आज के समय में 10% लोग वेरीकोज वेन्स से पीड़ित हैं।
* महिलाओं में यह संख्या पुरुषों की अपेक्षा और भी अधिक है, यदि मकड़ी नसों समस्या का इलाज न किया जाये इससे बेचैनी, खिंचाव, पैरों में सूजन, खुजली जैसी परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं।

लक्षण (Symptoms)
ऐसी समस्या पुरुषों से अधिक महिलाओं में पाई जाती है। 
इसकी वजह से जरुरी नहीं कि सबको परेशानी हो पर कुछ लोगों में पैरों में सूजन, खून का जमना, त्वचा का रंग बदलना जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलती हैं। 
इसके साथ ही त्वचा का सूखना, खुजली होना और त्वचा का फटना जैसी परेशानियाँ भी हो सकती हैं।

कुछ अन्य कारण (Causes)
1. नसों के वाल्व (द्वार) का ठीक से काम न करना।
2. उम्र के कारण वाल्व (द्वार) का ठीक से काम न करना और साथ ही नसों में खून के भरने से सूजन आ जाना।
3. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण।
4. मोटापे के कारण भी नसें सूज जाती हैं।
5. आनुवांशिकता भी एक कारण हो सकती है।
6. जब वाल्व्स (valves) ठीक से कार्य नहीं करते तो रक्त धमनियों में ही रहता है, जिसकी वजह से इसमें सूजन आ जाती है और वेरिकोज़ नसों की समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
त्वचा की सतह पर दिखने वाली छोटी नसों को स्पाइडर नसें (spider veins) कहा जाता है।
7. उम्र का कारक भी वेरिकोज़ नसों की बढ़त में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
उम्र के साथ नसें अपनी लचक खोती रहती हैं। 
इन नसों के वाल्व्स कमज़ोर हो जाते हैं और दिल में रक्त जाने में समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
ये धमनियां नीली इसलिए दिखती हैं, क्योंकि इनमें ऑक्सीजन (oxygen) से रहित खून होता है जो फेफड़ों से सारे शरीर में जाने की प्रक्रिया में होता है।
8. जवानी के फूटने, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति (menopause) की अवस्था में महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसकी वजह से वेरिकोज़ नसें दिखने लगती हैं। 
कई बार हार्मोनल पूरक उत्पाद और गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से भी ये धमनियां वेरिकोज़ नसों में बदल जाती हैं।

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