हर 4 में से 1 भारतीय बच्चे को है डिप्रेशन!

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हर 4 में से 1 भारतीय बच्चे को है डिप्रेशन!

आज विश्व स्वास्थ्य दिवस यानी वर्ल्ड हेल्थ डे है. विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की स्थापना के उपलक्ष्य में हर साल 7 अप्रैल को मनाए जानेवाले इस दिन हर वर्ष स्वास्थ्य से संबंधित एक थीम का चयन किया जाता है. इस साल वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम है डिप्रेशन. प्रस्तुत हैं डिप्रेशन से संबंधित WHO की ताज़ा रिपोर्ट की ख़ास बातें.  

बढ़े डिप्रेशन के मामले  
दुनियाभर में मानसिक बिमारियों का एक प्रमुख कारण डिप्रेशन है. WHO रिपोर्ट के मुताबिक़ ‌वर्ष 2005 से वर्ष 2015 के बीच दुनियाभर में डिप्रेशन के मामलों में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. आंकड़े भारत के बारे में जो संकेत देते हैं, वो डरानेवाले हैं. भारत में 13 से 15 साल की उम्र का हर 4 में से 1 बच्चा अवसाद यानी डिप्रेशन का शिकार है. भारत की जनसंख्या 131.11 करोड़ है जिसमें से 13 से 15 साल की उम्र के किशोरों की संख्या 7.5 करोड़ है. यह कुल जनसंख्या का 5.8% है. पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं. 

आत्महत्या मौत का दूसरा बड़ा कारण
WHO की दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि डिप्रेशन, आत्महत्या का कारण बन सकता है और दक्षिण पूर्व एशिया में 15 से 29 वर्ष की उम्र के लोगों के बीच मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या ही है. दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों में से भारत में सबसे ज्यादा आत्महत्या की जाती है. WHO ने ‘दक्षिण पूर्व एशिया में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति’ नामक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2012 में भारत में 15 से 29 साल के उम्रवर्ग के प्रति 1 लाख व्यक्ति पर आत्महत्या दर 35.5 थी. अवसाद यानी डिप्रेशन पर केंद्रित WHO की रिपोर्ट बताती है कि 7% किशोर अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों और बड़े लोगों की टिप्पणियों से आहत महसूस करते हैं. रिपोर्ट कहती कि 25% किशोर 'अवसादग्रस्त और उदास या निराश' हैं जबकि 11% ज़्यादातर समय अपने काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते.

अकेलापन महसूस करते हैं बच्चे
WHO का कहना है कि 8% किशोर चिंता की वजह से बेचैनी के शिकार हैं या वे सो नहीं पाते हैं. वहीं 8 प्रतिशत किशोर ज़्यादातर समय अकेलापन महसूस करते हैं. 10.1% किशोरों का कोई घनिष्ठ मित्र नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने शिकायत की है कि उनके माता-पिता उन्हें पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं. अकेलेपन का शिकार 4 प्रतिशत किशोर तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं, जबकि 8 प्रतिशत शराब पीते हैं.