स्वास्थ्य समाचार

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Updated: 3 hours 9 min ago

शयनकक्ष में बहुत रोशनी बढ़ा सकती है मोटापा

31 October, 2017 - 06:41

लंदन : क्या आपको आपकी बढ़ती वजन की कोई वजह नजर नहीं आ रही तो आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि आपके शयनकक्ष में तेज रोशनी तो नहीं रहती। एक नए अध्ययन से बात सामने आई है कि सोते वक्त कमरे में बहुत अधिक रोशनी महिलाओं में वजन बढ़ाने की वजह होती है।
लंदन स्थित इंस्टीट्युट आफ कैंसर रिसर्च के प्राध्यापक एंटनी स्वेर्डलॉ ने कहा, “हमें हमारे अध्ययन में रोशनी और मोटापे के बीच के संबंध बेहद पहेलीनुमा नजर आए।”
इस अध्ययन में 40 साल की 113,000 से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया।

श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक इलाज

29 October, 2017 - 06:00

अधिकतर महिलाएं ल्यूकोरिया जैसे-श्वेतप्रदर, सफेद पानी जैसी बीमारियो से जुझती रहती हैं, लेकिन शर्म से किसी को बताती नहीं और इस बीमारी को पालती रहती हैं। यह रोग महिलाओं को काफी नुकसान पहुंचाता है। इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए पथ्य करने के साथ-साथ योगाभ्यास का नियमित अभ्यास रोगी को रोग से छुटकारा देने के साथ आकर्षक और सुन्दर भी बनाता है।

कारण

इडली को क्‍यूं माना जाता है वर्ल्‍ड का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट

27 October, 2017 - 06:00

साउथ इंडिया का सबसे पॉपुलर ब्रेकफास्‍ट अगर किसी को माना जाता है तो वह है इडली। इडली, सांभर और नारियल की चटनी ना केवल खाने में ही टेस्‍टी होते हैं बल्‍कि नाश्ते के लिए संतुलित पोषण से भी भरी हुई है।

क्‍या आप जानते हैं कि इडली को विश्‍व का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट माना गया है क्‍योंकि इसमें ढेर सारा प्रोटीन, विटामिन और मिनरल होता है। इडली को उड़द की दाल और उसने चावल से तैयार किया जाता है जो कि अन्‍य चावल के मुकाबले ज्‍यादा अच्‍छा होता है। इसी के साथ उड़द दाल में भी उच्‍च मात्रा में फाइबर, 26% प्रोटीन, विटामिन B1/B2/B6 और कुछ मात्रा में मिनरल्‍स होते हैं।

तुलसी का काढ़ा फायदा ही फायदा

26 October, 2017 - 07:47

तुलसी का काढ़ा पीने से निकलती है किडनी की पथरी बाहर, ये हैं 10 फायदे

भारत के हर हिस्से में तुलसी का पौधा पाया जाता है। इसका पौधा केवल डेढ़ या दो फुट तक बढ़ता है। तुलसी को हिन्दू संस्कृति में अतिपूजनीय पौधा माना गया है। माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं। यह हवा को भी शुद्ध बनाने का कार्य करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं। आज हम तुलसी से जुडे आदिवासियों के ऐसे 10 हर्बल नुस्खों के बारे में बता रहे है जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना हो।

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गर्मियों में हृदय को दे सुरक्षा

26 October, 2017 - 06:46

र्मी के मौसम  मे बुुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति  और खासतौर से हृदय रोग से पीडि़त व्यक्ति को  खास ध्यान देने की जरूरत होती है। वे जिन्हें पहले से ही हृदय की समस्या है उन्हें ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित रखने के लिए कुछ प्रकार की दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। अत्यधिक गर्मी और उमस शरीर के संतुलन को बिगाडऩे का काम करती है। 

ब्‍लड ग्रुप के अनुसार कैसा होना चाहिये आपका आहार

25 October, 2017 - 06:58

इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों का इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) बहुत संवेदनशील होता है तथा उन्हें अपने प्रतिरक्षा तंत्र की अच्छी देखभाल करनी चाहिए। इस ब्लड समूह के लोगों में मांस को पचाने की क्षमता भी कम होती है। अत: उन्हें चिकन, मटन या मछली का सेवन कम करना चाहिए। उन्हें गाजर, आडू, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंजीर, नाशपाती, लहसुन, ब्रोकोली और एवोकेडो का सेवन अवश्य करना चाहिए।

ए ब्लड ग्रुप वाले ना खाएं ये चीज़ें

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग।

25 October, 2017 - 06:00

अवटु ग्रंथि (थाइरोइड ग्लैंड) के अतिस्राव से उत्पन्न कम्पन, घबराहट और अनिद्रा जैसी उत्तेजनापूर्ण स्थिति में शंखपुष्पी काफी अनुकूल प्रभाव डालती है। अवटु ग्रंथि से थायरो टोक्सिन के अतिस्राव से हृदय और मस्तिष्क से हृदय और मस्तिष्क दोनों प्रभावित होते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा

24 October, 2017 - 06:58

सभी रोगों, उनके कारण और उपचार एक हैं। दर्दनाक और पर्यावरणीय स्थिति को छोड़कर, सभी रोगों का कारण एक है यानी शरीर में रुग्णता कारक पदार्थ का संचय होना। सभी रोगों का उपचार शरीर से रुग्णता कारक पदार्थ का उन्मूलन है। रोग का प्राथमिक कारण रुग्णता कारक पदार्थ का संचय है। बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर तभी जीवित रहते हैं जब रुग्णता कारक पदार्थ का संचय हो और उनके विकास के लिए एक अनुकूल वातावरण शरीर में स्थापित हुआ हो। अतः रोग का मूल कारण रुग्णता कारक पदार्थ है और बैक्टीरिया द्वितीयक कारण बनते हैं। गंभीर बीमारियां शरीर द्वारा आत्म चिकित्सा का प्रयास होती हैं। अतः वे हमारी मित्र हैं, शत्रु नही

सावधान! प्रेग्नेंट हैं, तो दूर रहें माइक्रोवेव और मोबाइल से

23 October, 2017 - 06:00

जी हां प्रेग्नेंट महिलाओं को न केवल माइक्रोवेव से, बल्कि मोबाइल से भी दूर रहना चाहिए। हैरत होगी यह जानकर कि गर्भ में पल रहा बच्चा इन चीजों से डरता है। बात करें मोबाइल की, तो फोन की घंटी या वाइब्रेशन गर्भ में पल रहे बच्चे को डराती है। इससे कई बार उसकी नींद टूटती है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। रिसर्च में यह बात सामने आई है। न्यूयॉर्क  के  विकोफ हाइट्स मेडिकल सेंटर के  शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि छठे से नौंवे माह का गर्भस्थ शिशु मोबाइल की घंटी बजने पर एकदम चौंकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि मोबाइल ऐसी जगह रखें जहां से उसकी घंटी की आवाज गर्भस्थ बच्चे को न सुनाई दे।

 

मोती जैसे सफेद दांत पाने के लिए ट्राई करें ये 5 घरेलू उपाय

23 October, 2017 - 05:28

क्या आप अपने गंदे मैले और गंदे दांतों की वजह से खुलकर मुस्कुराने से डरते हैं? ऐसे कई बार होता है जब ब्रश करने और नियमित रूप से फ़्लॉसिंग के बाद भी आपके दांत सफेद नहीं हो पाते हैं।

खैर, अब यह समय अन्य विकल्पों की तलाश करने का है। सबसे पहले आपको यह समझने की ज़रूरत है कि आपके दांत पीले क्यों होते हैं।

आपको बता दें कि पीले दांत दाग के कारण है होते हैं। जाहिर है दांत पीले होने के बाद आप डॉक्टर के पास भागते हैं। लेकिन सवाल यह है कि कोई व्यक्ति भला कितनी बार डॉक्टर के पास जाए।

इस पॉपुलर डाइट का सेवन करने वाले लोग हो सकते हैं अंधे, जानिए बचने के उपाय

22 October, 2017 - 22:23

आमतौर पर दो ही तरह की डाइट का सेवन करने वाले लोग होते हैं एक वेजेटेरीयन और दूसरा नॉन वेजेटेरीयन। लेकिन आजकल एक डाइट और भी इस्तेमाल हो रही है, जी हाँ हम वीगन डाइट की बात कर रहें हैं।

वीगन डाइट एक ख़ास तरह की वेजीटेरियन डाइट ही है लेकिन इस डाइट को खाने वाले लोग मीट या अंडे से ही नहीं बल्कि दूध से भी बनी सभी चीज़ों से दूर रहने के साथ साथ हर उस चीज से दूर रहते हैं जो एनिमल यानी पशुओं से मिलते हैं या फिर बनते हैं।

क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे?

22 October, 2017 - 06:01

सर्दियों के मौसम में हाथ-पैरों का ठंडा होना सामान्य है। यूं भी ठंड का सामना करने की क्षमता हर व्यक्ति की अलग होती है। पर कुछ लोग हल्की-सी ठंड भी बर्दाश्त नहीं कर पाते। उनकी उंगलियां हर समय ठंडी रहती हैं। ऐसा होना कुछ और बातों की ओर भी इशारा करता है, जन्हिें  समझना जरूरी है। इस बारे में बता रही हैं अमृता प्रकाश 

स्किन कैंसर से नहीं बचा सकते सन्सक्रीन

21 October, 2017 - 06:02

जब त्वचा कैंसर से खुद को बचाने की बात हो, तो मन में थोड़ा डर होना जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि त्वचा कैंसर के डर और चिंता से ग्रस्त लोग इस बीमारी के उत्पन्न होने की वजहों को जानने और सावधानी बरतने के बजाय त्वचा पर सन्सक्रीन लगाने का विकल्प चुनते हैं।

माइग्रेन के दर्द से बचाता है ये आहार

21 October, 2017 - 06:00

आजकल लोगों में माइग्रेन की समस्या बढ़ती जा रही है जिसका मुख्य कारण जीवनशैली में आने वाला बदलाव है। लोगों की खान-पान व रहन सहन की आदतों में बहुत बदलाव आए हैं जो कि सेहत से जुड़ी समस्याओं को पैदा करते हैं। माइग्रेन एक मस्तिष्क विकार माना जाता है।
आमतौर पर लोग माइग्रेन की समस्या के दौरान अपने आहार पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं जो कि दर्द को और भी बढ़ा सकते हैं। माइग्रेन की समस्या होने पर ज्यादातर लोग दवाओं की मदद लेकर इससे निजात पाना चाहते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि ये दवाएं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। जानें माइग्रेन में किस तरह के आहार का सेवन करना चाहिए।

कब्‍ज के उपचार के घरेलू उपाय

18 October, 2017 - 11:45

अक़सर आपका पेट ठीक तरह से साफ नहीं होता है तो इसका मतलब कब्ज हो सकता है और आपके शरीर में तरल पदार्थ की कमी है। कब्ज के दौरान आप खुद में तरोजाता महसूस नहीं कर पाते। कब्ज का यदि ठीक समय पर इलाज न कराया जाए तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकता है। कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कूते जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यांदि होती हैं। कब्ज के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार तो मौजूद है ही साथ ही आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से भी कब्ज को दूर किया जा सकता है। आइए जानें कब्ज के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपचार मौजूद हैं।

व्रत से जुड़ी गलतफहमियां

18 October, 2017 - 06:04

नवरात्र आते ही चारों ओर उत्सव का माहौल छा जाता है और इसके साथ ही शुरू हो जाता है नौ दिनों के व्रत का सिलसिला। आमतौर पर व्रत के पारंपरिक आहार में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इससे व्रत के दौरान पाचन संबंधी समस्याएं परेशान करने लगती हैं और व्रत के बाद वजन भी बढ़ जाता है। दरअसल, पुराने समय में लोग ज्यादा शारीरिक श्रम करते थे इसलिए व्रत के दौरान कुट्टू की पकौडिय़ां, सिंघाड़े का हलवा, मखाने की खीर या रबड़ी जैसी चीजें आसानी से हजम हो जाती थीं, पर अब जीवनशैली बदल चुकी है। शहरों में लोग छोटे-छोटे फ्लैट्स में रहते हैं, घरेलू कामकाज को आसान बनाने के लिए वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर और फूड प्रोसेसर जैसे

किडनी को ख़राब करने वाली है ये आदतें…….

18 October, 2017 - 06:00

किडनी की बीमारियां

किडनी की बीमारियां एवं किडनी फेल्योर पूरे विश्व एवं भारत में खतरनाक तेजी से बढ़ रहा है। भारत में प्रत्येक 10 में से एक इंसान को किसी ना किसी रूप में क्रोनिक किडनी की बीमारी होने की संभावना होती है। हर साल करीब 1,50,000 लोग किडनी फेल्योर की अंतिम अवस्था के साथ नये मरीज बनकर आते हैं, जिन्हें या तो डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होगी। कुछ आम आदतें किडनी की सेहत बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार होती हैं तो चलिये जानते हैं किडनी को ख़राब करने वाली आदतों के बारे में।

किडनी का महत्व

मोटापे से कमज़ोर होती है याददाश्त?

17 October, 2017 - 08:17

कहते हैं मोटापा सौ बीमारियों की एक बीमारी है. इससे ब्लड प्रेशर की शिकायत हो जाती है, आप चलने-फिरने से लाचार होने लगते हैं. शुगर बढ़ने लगती है.

मोटापा याददाश्त कमज़ोर करता है, शायद ये आपको नहीं पता. यही नहीं अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी को भी जन्म देता है.

वैज्ञानिक रिसर्च साबित करती है कि मोटापे और याददाश्त में दो-तरफ़ा रिश्ता होता है. दोनों आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.

मुहांसे दूर करने के नुस्खे

16 October, 2017 - 06:04

आप अपने चेहरे पर मुहांसों से परेशान हैं तो अपनाएं कुछ ऐसे नुस्खे जिससे आपकी सारी समस्या दूर हो जाएगी.

मुहांसे क्या हैं?

मुहांसे (Pimples or Acne) त्वचा की एक स्थिति है जो सफेद, काले और जलने वाले लाल दाग के रूप में दिखते हैं. यह लगभग 14 वर्ष की आयु से शुरू होकर 30 वर्ष तक कभी भी निकल सकते हैं. ये निकलते समय तकलीफदायक होते हैं और बाद में भी इसके दाग-घब्बे चेहरे पर रह जाते हैं.

मुहांसों के कारण

- त्वचा में तेल की अत्यधिक मात्रा का स्राव

- हार्मोनल परिवर्तन के कारण

- त्वचा के बाहरी हिस्से में रुकावट

कड़वे अनुभव से दूर रहना है तो खाएं मीठी नीम

15 October, 2017 - 07:03

हम भोजन में से कढ़ी पत्ता अक्सर निकाल कर अलग कर देते है. इससे हमें उसकी खुशबू तो मिलती है पर उसके गुणों का लाभ नहीं मिल पाता. कढ़ी पत्ते को धो कर छाया में सुखा कर उसका पावडर इस्तेमाल करने से बच्चे और बड़े भी भी इसे आसानी से खा लेते है, इस पावडर को हम छाछ और निम्बू पानी में भी मिला सकते है. इसे हम मसालों में, भेल में भी डाल सकते है. प्रतिदिन भोजन में कढ़ी पत्ते को दाल, सब्ज़ी में डालकर या चटनी बनाकर प्रयोग किया जा सकता है, जिस प्रकार दक्षिण भारत में किया जाता है.

इसकी छाल भी औषधि है. हमें अपने घरों में इसका पौधा लगाना चाहिए.

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