अनमोल वचन

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Updated: 17 hours 22 min ago

शीर्षासन – विधि – लाभ

5 February, 2018 - 11:33

विधि 

       

  •  शीर्षासन करने के लिए के सबसे पहले दरी बिछा कर समतल स्थान  पर वज्रासन की अवस्‍था में बैठ जाएं।
  • अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें।
  • दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ लें।
  • अब सिर को दोनों हथेलियों के मध्य धीरे-धीरे रखें। सांस सामान्य रखें।
  • सिर को जमीन पर टिकाने के बाद धीरे-धीरे शरीर का पूरा वजन सिर छोड़ते हुए शरीर को ऊपर की उठाना शुरू करें।
  • शरीर का भार सिर पर लें।

लाभ 

       

मयूरासन – विधि – लाभ

5 February, 2018 - 11:31

इसमें शरीर मोर की तरह आकार लेता है, इसलिए इसे मयूरासन कहते हैं।

विधि 

  • जमीन पर पेट के बल लेट जाइए।
  • दोनों पैरों के पंजों को आपस में मिलाइए।
  • दोनों घुटनों के बीच एक हाथ का अंतर रखते हुए दोनों पैरों की एड़ियों को मिलाकर गुदा को एड़ी पर रखिए।
  • फिर दोनों हाथों को घुटनों के अंदर रखिए ताकि दोनों हाथों के बीच चार अंगुल की दूरी रहे।
  • दोनों कोहनियों को आपस में मिला कर नाभि पर ले जाइए।
  • अब पूरे शरीर का वजन कोहनियों पर दे कर घुटनों और पैरों को जमीन से उठाये रखिए। सिर को सीधा रखिए।

 लाभ 

विपरीत करनी आसन – विधि – लाभ

3 February, 2018 - 13:05

विधि 

  •  दीवाल से करीब 3 इंच की दूरी पर कम्बल फैलाएं.
  • पैरों को दीवाल की ओर फैलाकर कम्बल पर बैठ जाएं.
  •  शरीर के ऊपरी भाग को पीछे की ओर झुकाकर कम्बल पर लेट जाएं. इस अवस्था में दोनों पैर दीवाल से ऊपर की ओर होने चाहिए.
  •  बांहों को शरीर से कुछ दूरी पर ज़मीन से लगाकर रखें. इस अवस्था में हथेलियां  ऊपर की ओर की होनी चाहिए.
  •  सांस छोड़ते हुए सिर, गर्दन और मेरूदंड को ज़मीन से लगायें
  •  इस मुद्रा में 5 से 15 मिनट तक बने रहें.
  •  घुटनों को मोड़ेते हुए दायीं ओर घूम जाएं और फिर सामान्य अवस्था में बैठ जाएं.

 लाभ 

शवासन – विधि – लाभ

3 February, 2018 - 13:02

मृत शरीर जैसे निष्क्रिय होता है उसी प्रकार इस आसन में शरीर निष्क्रिय मुद्रा में होता है अत: इसे शवासन कहा जाता है. इस आसन का अभ्यास कोई भी कर सकता है. यह शरीर को रिलैक्स प्रदान करने वाला योग है.

विधि 

चक्रासन – विधि – लाभ

3 February, 2018 - 13:00

चक्रासन योग में शरीर का आकार चक्र / पहिए के समान होने के कारण इसे Wheel Pose भी कहा जाता हैं। धनुरासन के विपरीत होने के कारण इसे उर्ध्व धनुरासन भी कहा जाता हैं। चक्रासन यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने की लिए एक श्रेष्ठ आसन हैं।

विधि 

कर्णपीड़ासन – विधि -लाभ

2 February, 2018 - 14:30

कर्णपीड़ासन :- इस आसन को करने से कान में पीड़ा होती है इसीलिए इसे कर्णपीड़ासन कहते है

विधि 

  • पीठ के बल धरती पर लेट जाइए।
  • अपने दोनों पैरों को उठायें और पीछेे की ओर इतना ले जाएँ की दोनों घुटने कानों को छुएं।
  • इस स्थिति में स्थिर रहें।        

लाभ 

  • इस आसन के निरंतर अभ्यास से मस्तिष्क, गला, नाक, कान, इत्यादि शारीरिक अंगो को लाभ होता है।
  • आँखों की रौशनी बढ़ती है।
  • मोटापा, श्वास से सम्बंधित रोग जैसे दमा, कान के रोग, बवासीर, कब्ज़, रक्त के दोष, इत्यादि रोग दूर होते हैं

 

त्रिकोणासन – विधि – लाभ

2 February, 2018 - 14:26

त्रिकोण आसन  का अभ्यास खड़ा रहकर किया जाता है.यह आसन  पार्श्व कोणासन से मिलता जुलता है.इस योग से हिप्स, पैर, टखनों, पैरों और छाती का व्यायाम होता है.यह मु्द्रा कमर के लिए भी लाभप्रद है.इस मुद्रा का अभ्यास किस प्रकार करना चाहिए.इस मुद्रा की अवस्था क्या है एवं इससे क्या लाभ मिलता है आइये इसे देखें.

विधि 

सुप्त बद्धकोणासन योग – विधि – लाभ

2 February, 2018 - 14:21

विधि 

  • शवासन की मुद्रा में पीठ के बल लेट जाएं.
  • बांहों को शरीर के दोनों तरफ पैर की दिशा में फैलाकर रखें. इस स्थिति में हथेलियां छत की दिशा में रहनी चाहिए.
  • घुटनो को मोड़ें और तलवों को ज़मीन से लगाकर रखें.
  • दोनों तलवों को नमस्कार की मुद्रा में एक दूसरे के करीब लाकर ज़मीन से लगाएं.
  • जितना संभव हो ऐड़ियों को जंघा की ओर करीब लाएं.
  • इस मुद्रा में 30 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें.
  • हाथों से दोनो जंघा को दबाएं और धीर धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं.

लाभ 

वज्रासन – विधि – लाभ

2 February, 2018 - 14:18

वज्रासन सामान्य रूप से बैठकर किया जाना जाने वाला योग है. इस योग में जंघाओं, घुटनों, पैरों एवं कोहनियों का व्यायाम होता है. इस मु्द्रा से शरीर का पीछला भाग संतुलित रहता है. शरीर को सुडौल बनाए रखने के लिए भी यह योग लाभप्रद होता है.

विधि 

वृक्षासन – विधि – लाभ

28 January, 2018 - 12:11

वृक्षासन का अर्थ है वृक्ष के समान मुद्रा. इस आसन को खड़े होकर किया जाता है. नटराज आसन के समान यह आसन भी शारीरिक संतुलन के लिए बहुत ही लाभप्रद है

विधि 

नटराज आसन – विधि – लाभ

27 January, 2018 - 15:24

नटराज भगवान शंकर को कहा गया है.भगवान शंकर का नर्तक रूप ही नटराज है.योग की यह मुद्रा शरीरिक संतुलन के लिए बहुत ही लाभप्रद है.इस योग का अभ्यास खड़ा रहकर किया जाता है.

विधि

गोमुख आसन – विधि – लाभ

9 January, 2018 - 14:17

गोमुख आसन शरीर को सुडौल और सुदृढ़ बनाने वाला योग है. योग की इस मुद्रा को बैठकर किया जाता है.इस मु्द्रा में मूल रूप से दानों हाथ, कमर और मेरूदंड का व्यायाम होता है.गोमुख आसन स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभप्रद व्यायाम है.

विधि

ध्यान : सब कुछ आपके केंद्र में लौटता है

3 January, 2018 - 18:04

किसी वृक्ष के नीचे बैठ जाओ। हवा बह रही है और वृक्ष के पत्तों में सरसराहट की आवाज हो रही है। हवा तुम्हें छूती है, तुम्हारे चारों तरफ डोलती है और गुजर जाती है। लेकिन तुम उसे ऐसे ही मत गुजर जाने दो; उसे अपने भीतर प्रवेश करने दो और अपने में होकर गुजरने दो। आंखें बंद कर लो और जैसे हवा वृक्ष से होकर गुजरे और पत्तों में सरसराहट हो, तुम भाव करो कि मैं भी वृक्ष के समान खुला हुआ हूं और हवा मुझमें भी होकर बह रही है--मेरे आस-पास से नहीं, ठीक मेरे भीतर से होकर बह रही है। वृक्ष की सरसराहट तुम्हें अपने भीतर अनुभव होगी और तुम्हें लगेगा कि मेरे शरीर के रंध्र-रंध्र से हवा गुजर रही है।

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ध्यान : उगते सूरज की प्रशंसा में

3 January, 2018 - 18:03

सूर्योदय से पहले पांच बजे उठ जाएं और आधे घंटे तक बस गाएं, गुनगुनाएं, आहें भरें, कराहें। इन आवाजों का कोई अर्थ होना जरूरी नहीं--ये अस्तित्वगत होनी चाहिए, अर्थपूर्ण नहीं। इनका आनंद लें, इतना काफी है--यही इनका अर्थ है। आनंद से झूमें। इसे उगते हुए सूरज की स्तुति बनने दें और तभी रुकें जब सूरज उदय हो जाए।

इससे दिन भर भीतर एक लय बनी रहेगी। सुबह से ही आप एक लयबद्धता अनुभव करेंगे और आप देखेंगे कि पूरे दिन का गुणधर्म ही बदल गया है--आप ज्यादा प्रेमपूर्ण, ज्यादा करुणापूर्ण, ज्यादा जिम्मेवार, ज्यादा मैत्रीपूर्ण हो गए हैं ; और आप अब कम हिंसक, कम क्रोधी, कम महत्वाकांक्षी, कम अहंकारी हो गए हैं।

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नौकासन सिर से ले कर पैरों तक की सभी बीमारियां दूर करे

3 January, 2018 - 17:56

नौका आसन यानी नाव के समान मुद्रा। पीठ एवं मेरूदंड को लचीला व मजबूत बनाये रखने के लिए नौकासन का अभ्यास काफी लाभदायक होता है। यह आसन ध्यान और आत्मबल को बढ़ाने में भी कारगर होता है। कंधों एवं कमर के लिए भी यह व्यायाम फायदेमंद है। शरीर को सुडौल बनाये रखने के लिए भी यह आसन बहुत ही लाभदायक होता है। 7 योग आसन जो आपके पेट को रखें स्वस्थ इससे पाचन क्रिया, छोटी-बड़ी आँत में लाभ मिलता है। अँगूठे से अँगुलियों तक खिंचाव होने के कारण शुद्ध रक्त तीव्र गति से प्रवाहित होता है, जिससे काया निरोगी बनी रहती है। हर्निया रोग में भी यह आसन लाभदायक माना गया है। निद्रा अधिक आती हो तो उसे नियंत्रित करने मे ये नौका आ

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शीर्षासन से ठीक रहता है ब्लड सर्कुलेशन

3 January, 2018 - 17:50

सिर के बल उल्टा हो जाने को शीर्षासन कहा जाता है। इसमें सिर या हाथों के बल अलग-अलग कोणों में शरीर को उल्टा किया जा सकता है। पूरे शरीर का संतुलन सिर या हाथों पर टिका होता है। योग शास्त्र में इसके कई फायदे बताए हैं।

लाभ 

ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है, मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से दिमाग सक्रिय होता है, ग्रंथियों की कार्य प्रणाली दुरूस्त होती है, पेट में स्थित अंगों जैसे आमाशय, लिवर, किडनी आदि एक्टिव होते हैं और पाचन तंत्र ठीक रहता है। ईसा पूर्व विख्यात ग्रीक फिजिशियन हिप्पोक्रेट्स भी रोगी को रस्सियों और पुली की सहायता से सीढियों पर उल्टा लटकाते थे।

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सूर्य नमस्कार

3 January, 2018 - 17:42

सूर्य नमस्कार योगासन एवं प्राणायाम दोनों का ही संख्यात्मक अभ्यास है |

अभ्यासक्रम में यह शिथिलीकरण व्यायाम एवं योगासन के मध्य में आता है | तथा योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए हमारे शरीर को तैयार करता है |

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बंद एवं मुद्राएं

3 January, 2018 - 17:39

 एवं मुद्राएं एवं मुद्राओं के अभ्यास के अभ्यास का प्रावधान हठयोग के ग्रंथों में मिलता है बंद योगाभ्यास का छोटा किंतु महत्व पूर्ण वर्ग है बंद का शाब्दिक अर्थ बांधना या नियंत्रित करना है बंद शरीर में प्राण वायु या विशेष की क्रियाओं को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं जिससे उनकी कार्य क्षमता को पूर्ण आराम देकर बढ़ाया जा सके समानता बंदूक का प्रयोग श्वास रोकने के लिए सुरक्षा तरल के रूप में किया जाता है

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लड़का हो या लड़की योग करो स्वस्थ रहो

29 December, 2017 - 23:17

योगा, विश्व को आज के शहरीकरण के दौर में स्वस्थ रखने का रामबाण इलाज है, जिसके तर्ज पर ही 21 जून को विश्व योगा दिवस के मनाया जाता है। योग सभी के लिए है और इसका नियमित अभ्‍यास करने से सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं। यह न केवल बीमारियों से बचाता है बल्कि नियमित योग करने से शरीर मजबूत होता है। लड़कों को योग क्‍यों करना चाहिए, इससे उनको क्‍या-क्‍या फायदा होगा। इस लेख में इसके बारे में चर्चा करते हैं।

73% योगा टीचर लड़कियां हैं, ऐसे में ह्वाई शुड गर्ल्स हैव ऑल द योगा?

इससे आपकी बॉ़डी फ्लेक्सिबल होगी और दर्द की शिकायत कम होगी।

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'यम' है योग का प्रथम अंग

29 December, 2017 - 23:15

यह हम सब को संभाले हुए है। निश्चित ही यह मनुष्य का मूल स्वभाव भी है। यम से मन मजबूत और पवित्र होता है। मानसिक शक्ति बढ़ती है। इससे संकल्प और स्वयं के प्रति आस्था का विकास होता है। 

यम के पाँच प्रकार हैं- (1) अहिंसा, (2) सत्य, (3) अस्तेय, (4) ब्रह्मचर्य और (5) अपरिग्रह

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