क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे?

क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे?

सर्दियों के मौसम में हाथ-पैरों का ठंडा होना सामान्य है। यूं भी ठंड का सामना करने की क्षमता हर व्यक्ति की अलग होती है। पर कुछ लोग हल्की-सी ठंड भी बर्दाश्त नहीं कर पाते। उनकी उंगलियां हर समय ठंडी रहती हैं। ऐसा होना कुछ और बातों की ओर भी इशारा करता है, जन्हिें  समझना जरूरी है। इस बारे में बता रही हैं अमृता प्रकाश 

सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। यूं तो इस मौसम में हाथ व पैर ठंडे होना सामान्य बात है, पर कुछ लोग ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों में ठंड ही नहीं, गर्मियों में भी तापमान में आयी थोड़ी सी कमी उंगलियों के ठंडे पड़ने का कारण बन जाती है। खासतौर पर महिलाएं इसकी अधिक शिकार होती हैं। 

नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के वरष्ठि फिजिशियन डॉ. संजय सनाध्या के अनुसार 'हाथ व पैर ठंडे पड़ने या अधिक ठंड लगने के कई कारण हो सकते हैं। कई लोगों में इसके कारण बेहद सामान्य होते हैं, मसलन ठंड सहने की उनकी क्षमता, पानी कम पीना या बीपी कम होना। इसके अलावा यदि लंबाई के अनुपात में वजन काफी कम है तो भी संभव है कि आपको ठंड अधिक लगती हो। वजन अधिक कम होने का मतलब शरीर में वसा की कमी है, जिससे शरीर गर्म नहीं रह पाता। यह इस बात का भी संकेत है कि आप पर्याप्त मात्रा में नहीं खा रहे हैं। ऐसे लोग खान-पान में सुधार करके राहत पा सकते हैं।'

डॉ. संजय के अनुसार, 'इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। रक्त की आपूर्ति बाधित होने के कारण भी हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते हैं। हाथों का रंग सफेद, बैंगनी, संतरी व नीला पड़ने लगता है। कुछ देर उन्हें गर्माहट देने पर वे फिर से ठीक हो जाते हैं। अधिक ठंडे इलाकों में रहने वालों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। अधिक तनाव की स्थिति में भी ऐसा होता है।  

 'हृदय रोगों से जूझ रहे लोगों को भी ठंड अधिक लगती है। धमनियां संकुचित होने के कारण हाथ व पैर की उंगलियों तक रक्त का प्रवाह ढंग से नहीं हो पाता। इसके अलावा गठिया के रोग से परेशान लोगों को भी सामान्य से अधिक ठंड लगती है।' 

 मूलचंद मेडसिटी में आयुर्वेद विभाग प्रमुख डॉ. शशि बाला कहती हैं, ' बाहर की ठंडी हवा हमारे फ्लूड सकुर्लेशन को प्रभावित करती है, जिससे हाथ व पैर ठंडे होना सामान्य है। जिन लोगों को ये समस्या अधिक रहती है, उन्हें शुरुआत से खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद में त्रिकुटि, पिपली चूर्ण और अश्वगंधा के सेवन से अधिक ठंड लगने की परेशानी में राहत मिलती है। खान-पान में गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करना चाहिए, पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अधिक मात्रा में चाय व कॉफी पिएं।' 
डॉ. शशिबाला के अनुसार, 'मात्र दस्ताने व जुराबें पहन कर बैठे रहना सही नहीं है। अपनी जीवनशैली को सुधारना भी जरूरी है।  धूम्रपान का सेवन न करें। कैफीनयुक्त चीजों से परहेज करें। अधिक तंग कपड़े व जूते न पहनें। नियमित व्यायाम से भी रक्तसंचार सही रहता है। खासतौर पर प्राणायाम व गहरे श्वास का अभ्यास करना शरीर में ऊर्जा भरता है।'

डॉ. संजय के अनुसार, 'अमूमन लोग हाथ-पैर के ठंडे होने को सामान्य मान कर इसके उपचार पर ध्यान नहीं देते, जबकि ये कुछ अन्य बातों का संकेत भी हो सकता है। '

खान-पान में इन्हें करें शामिल 
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दी खान-पान की दृष्टि से सबसे अच्छा मौसम है। कई तरह के मसाले, जड़ी-बूटियां व मौसमी फल-सब्जियां हैं, जन्हिें डाइट में शामिल करना ठंड में राहत देता है।  
लहसुन
एंटीवायरल गुणों से भरपूर लहसुन की कली को कच्चा चबाना फायदेमंद है। 

आंवला
इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में  होते हंै, जो कोशिकाओं को क्षतग्रिस्त होने से बचाते हैं। पाचन में लाभकारी होने के साथ-साथ  यह शरीर को सभी तरह के पोषण को ग्रहण करने में सक्षम बनाता है।  

शहद
एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है। मौसमी बुखार व संक्रमण को दूर रखने में सहायता मिलती है। शरीर को ऊर्जा देता है। 

ये भी हैं ठंड का कारण 

शरीर में आयरन की कमी 
लाल रक्त कोशिकाओं को पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के अलावा शरीर के विभन्नि हस्सिों से ऊष्मा और पोषक तत्वों को लाने-पहुंचाने में आयरन की अहम भूमिका होती है। आयरन की कमी का सीधा मतलब यह है कि शरीर अपने ये सभी काम सुचारू रूप से कर पाने में सफल नहीं हो पाएगा। आयरन की इस कमी के कारण कंपकंपी भी आती है। इसके अलावा आयरन की कमी से थाइरॉएड ग्लैंड का स्राव भी प्रभावित होता है, जो ठंड लगने का एक और कारण है।

शरीर में आयरन की इस कमी को दूर करने में आयरन सप्लीमेंट के साथ डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। मीट, अंडा, हरी पत्तेदार सब्जियां और सी-फूड आदि  पदार्थों को डाइट में शामिल करें। 

दवाओं का असर 
कई दवाएं हैं, जिनका लंबे समय तक सेवन धमनियों को संकुचित कर सकता है। इससे रक्त संचार में समस्या आती है और हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं। खासतौर पर केमस्टि की दुकान से बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेते समय इसका ध्यान रखें। 

रक्तसंचार है कमजोर
सामान्य तापमान पर भी हाथ व पैर का बहुत ठंडा रहना रक्त संचार में समस्या का संकेत हो सकता है, जिससे खून सही ढंग से हाथ व पैरों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसा धमनियों में किसी तरह की ब्लॉकेज के कारण हो सकता है या फिर जब दिल खून को ठीक तरीके से पंप न कर पा रहा हो। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो भी रक्तसंचार से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। रेनॉड्स बीमारी की वजह से भी ज्यादा ठंड लगती है। इस बीमारी में तापमान में जरा-सी गिरावट पर हाथ और पैर की रक्त वाहिनियां कुछ देर के लिए अपने-आप सिकुड़ जाती हैं। उनके रंग में भी अंतर दिखता है। 
लंबे समय तक हाथ-पैर ठंडे होने की परेशानी को अनदेखा न करें।

रक्तचाप कम होने पर भी हाथ और पैर ठंडे रहते हैं। शरीर में पानी व खून की कमी, पेट की अनियमितता व कुछ दवाओं का असर इसका कारण हो सकता है। 

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का काम विटामिन बी12 ही करता है। इसकी कमी होने पर पूरे शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप अधिक ठंड लगती रहती है। 

शरीर में विटामिन बी12 की कमी का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी है। आमतौर पर यह जानवरों से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों में अधिक होता है। इसकी कमी को दूर करने के लिए डाइट में मीट, मछली और दूध से बने प्रोडक्ट्स शामिल करें। एक टेस्ट के जरिए शरीर में इसकी कमी को जांचा जा सकता है। 

थाइरॉएड का असर 
जब थाइरॉएड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थाइरॉएड  हार्मोन का स्राव नहीं करती तो शरीर का मेटाबॉलज्मि धीमा पड़ने लगता है, जिससे शरीर पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न नहीं करता। थाइरॉएड हार्मोन का स्राव कम होने को हाइपोथाइरॉएडज्मि कहते हैं। बालों का तेजी से गिरना, रूखी त्वचा, तेजी से वजन बढ़ना और ज्यादा थकान इसके लक्षण हैं। 

तनाव और बेचैनी 
तनाव की अधिकता पूरे शरीर पर असर डालती है। हाथ और पैर भी इसके असर से बच नहीं पाते। कई बार हाथ-पैर बहुत ठंडे रहते हैं तो कई बार हाथों से अधिक पसीना आता है। लंबे समय तक नींद की कमी के कारण भी पूरा शरीर सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देता है। विभन्नि अध्ययनों के मुताबिक नींद की कमी के कारण हमारे मस्तष्कि के उस हस्सिे की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। अपनी नींद के साथ किसी भी तरह का समझौता न करें। सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लें।