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कोलेस्ट्रोल के नाम पर महाधोखा

कोलेस्ट्रोल के नाम पर महाधोखा

चालीस साल से कोलेस्ट्रोल के नाम पर दुनिया को धोखा दिया जा रहा था। 
अमेरिकी डाक्टरों, वैज्ञानिकों और ड्रग कंपनियों के गठजोड़ ने 1970 से अब तक कोलेस्ट्रोल कम करने की दवाएं बेच-बेच कर 1.5 खरब डालर डकार लिए। 
बेहिचक इसे कोलेस्ट्रोल महाघोटाला कहा जाए तो कोई हर्ज नहीं। पेथलेबों में इसकी जांच का धंधा भी खूब चमका। डाक्टरों और ड्रगिस्ट की भी चांदी हुई। पता नहीं अनेक लोगों ने कोलेस्ट्रोल फोबिया के कारण ही दम तोड़ दिया होगा। कोलेस्ट्रोल घटाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव से ना मालूम कितने लोगों के शरीर में नई-नई विकृतियों ने जन्म लिया होगा। 

क्या आप इन रोगो से परेशान है ?

क्या आप इन रोगो से परेशान है ?

ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया,
डेंगू, स्वाइन फ्लू,
इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य प्रकार के बुखार का इलाज ...................¥

1. 20 पत्ते तुलसी, नीम पर चढ़ी हुई गिलोय (गुडूचि ,गिरुच ,अमृता) का सत् 5gm, सोंठ (सुखी अदरक) 10gm,
10 छोटी पीपर के टुकड़े, सब आपके घर मे आसानी से
उपलब्ध हो जाती है। सब एक जगह पर कूटने के बाद एक गिलास पानी में
उबालकर काढ़ा बनाना है ठन्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और श्याम
तीन बार पीना चाहिए।

पानी हमेशा घूँट-घूँट और बैठ कर पिएं !

पानी हमेशा घूँट-घूँट और बैठ कर पिएं !

पानी हमेशा घूँट-घूँट और बैठ कर पिएं !
पानी सदैव धीरे-धीरे पीना चाहिये अर्थात घूँट-घूँट
कर पीना चाहिये, यदि हम धीरे-धीरे पानी पीते हैं
तो उसका एक लाभ यह है कि हमारे हर घूँट में मुँह की
लार पानी के साथ मिलकर पेट में जायेगी और पेट में
बनने वाले अम्ल को शान्त करेगी क्योंकि हमारी
लार क्षारीय होती है और बहुत मूल्यवान होती है।
हमारे पित्त को संतुलित करने में इस क्षारीय लार
का बहुत योगदान होता है। जब हम भोजन चबाते हैं
तो वह लार में ही लुगदी बनकर आहार नली द्वारा
अमाशय में जाता है और अमाशय में जाकर वह पित्त

हिस्टीरिया : मनोरोग का प्रकोप

हिस्टीरिया : मनोरोग का प्रकोप

सर्वप्रथम एरंड तेल में भुनी हुई छोटी काली हरड़ का चूर्ण ५ ग्राम प्रतिदिन लगातार दे कर उसका उदर शोधन तथा वायु का शमन करें।

सरसों, हींग, बालवच, करजबीज, देवदाख मंजीज, त्रिफला, श्वेत अपराजिता मालकंगुनी, दालचीनी, त्रिकटु, प्रियंगु शिरीष के बीज, हल्दी और दारु हल्दी को बराबर-बराबर ले कर, गाय या बकरी के मूत्र में पीस कर, गोलियां बना कर, छाया में सुखा लें। इसका उपयोग पीने, खाने, या लेप में किया जाता है। इसके सेवन से हिस्टीरिया रोग शांत होता है।

लहसुन को छील कर, चार गुना पानी और चार गुना दूध में मिला कर, धीमी आग पर पकाएं। आधा दूध रह जाने पर छान कर रोगी को थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें।

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