करेला के गुण

करेला के गुण

एक असाध्य बीमारी है मधुमेह ‘डायबिटीज’ । करेला मधुमेह के रोगियों के लिए ‘अमृत’ तुल्य है। 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है और प्रात: चार किलोमीटर टहलना चाहिए तथा मिठाई खाने से परहेज रखना चाहिए। करेला मधुमेह के अलावा अन्य शारीरिक तकलीफों में भी लाभदायक है। जैसे-
कब्ज : नित्य करेला सेवन करने से कब्ज दूर होता है। यह एक अनुपम सब्जी है और इसमें ज्यादा तेल-मसाले नहीं डालने चाहिए।

पीलिया : ताजा करेले का रस सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।
दमा : दमा के मरीज भी करेले का रस सुबह खाली पेट लेकर राहत पा सकते हैं। सब्जी भी ज्यादा खानी चाहिए।

बादाम खाएं ,मोटापा,कोलेस्ट्रोल घटाएं

अक्सर हम अपने स्वास्थ्य का  भली प्रकार ध्यान नहीं रख पाते हैं | इसकी वजह से हमारा शरीर सुस्ती और कमजोरी महसूस करने लगता है| कोइ काम करने में अनिच्छा  और आलस्य  अनुभव होता है|  इस  स्थिति से रूबरू  होने पर  हम सुस्ती भगाने के लिए व्यायाम  भी शुरू का देते हैं जो अच्छी बात है  लेकिन  अगर आप नियमित रूप से एक मुट्ठी भर बादाम  सेवन  करेंगे  तो आपकी सेहत में काफी बदलाव  आता नजर आएगा|  बादाम हमारे शरीर को सिर्फ तन्दुरस्त ही नहीं रखता बल्कि मोटापा भी कम करता है| 

फटी एड़ियों से हैं परेशान तो अपनाएं ये 10 घरेलू नुस्खे

यहां हम आपको कुछ ऐसे घरेलू और आसान उपाय बता रहे हैं जिन्हें अपना कर एडियों की दरारों से छुटकारा पा सकते हैं -

 

त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं नकली टैटू

त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं नकली टैटू

असली टैटू बनवाने में होने वाले दर्द से बचने के लिए अगर आप नकली टैटू बनावाने की सोच रहे हैं तो सतर्क हो जाइए क्योंकि क्योंकि इनसे एलर्जी हो सकती है. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की एक रिपोर्ट में नकली टैटू को लेकर सचेत किया गया है.

इसमें कहा गया है कि अस्थाई टैटू से त्वचा पर फफोले और चकत्ते पड़ सकते हैं इसके साथ ही त्वचा में बदलाव, धूप में संवेदनशीलता बढ़ने जैसे दीर्घकालिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बबल गम के साथ मिलने वाले वेट-एंड-प्रेस टैटू के साथ अस्थायी टैटू के कई प्रकार हैं जिनमें संयत्र आधारित सिंथेटिक रंगों का प्रयोग किया जाता है.

सहजन का पेड़ सेहत का खजाना

सहजन का पेड़ सेहत का खजाना

सहजन या सुजना एक बहुत उपयोगी पेड़ है। इस सेंजन और मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है। इसे अंगे्रजी में ड्रमस्टिक भी कहा जाता है। इसका वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में भी सहजन का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है। दक्षिण भारत में व्यंजनों में इसका उपयोग खूब किया जाता है। सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसीलिए आज हम आपको परिचित करवाने जा रहे हैं। सहजन की कुछ

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