कलयुग में संजीवनी है कलौंजी (मंगरैला)

कलौंजी एक फायदे अनेक :
कलौंजी का पौधा सौंफ के पौधे से थोड़ा छोटा होता है। इसके फूल हल्के नीले व पीले रंग के होते हैं और इसके आकार तारे के समान होते हैं। लगभग घरों में होते हुए भी आप इसके गुणों से अब तक अनजान है ..! पूरी तरह संतृप्त किए गए बीज में जिंदगी की अत्यधिक ताकत होती है। ब्लैक सीड यानी कलौंजी के सेवन से आपका भविष्य रोग मुक्त बनता है। कलौंजी को रोमन कोरिएंडर, ब्लैक सीसेम, ब्लैक क्यूमिन, ब्लैक कैरावे तथा अनियन सीड के नाम से भी जाना जाता है। इसका इस्तेमाल औषधि, मसाले तथा सौंदर्य प्रसाधनों के तौर पर किया जाता है।

कैसे करें इसका सेवन :

लहसुन प्राकृतिक रूप एंटीबायोटिक का श्रोत है।

लहसुन प्राकृतिक रूप एंटीबायोटिक का श्रोत है।

लहसुन प्राकृतिक रूप से सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक का श्रोत है। लहसुन को हम रोज़ाना सब्जी, दाल, या किसी अन्य खाद्य पदार्थ में डाल कर सेवन करते हैं । इसमें एंटीबायोटिक, एंटीवायरल, एंटी-फ़ंगल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं। लहसुन हर तरह के रोगों को नष्ट करने में फायदेमंद है।

कैसे खाएं 

  • अपने खाने में लहसुन का तड़का लगा कर खाएं।
  • इसकी कुछ कलियाँ पीस कर उबालें और चाय की तरह पीएं
  • सर्दी लगने पर कच्ची लहसुन खाएं
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दालचीनी कैंडिडा जैसे फंगल इन्फेक्शन को ख़त्म करता है

दालचीनी  कैंडिडा

दालचीनी 

यह कैंडिडा जैसे फंगल इन्फेक्शन को ख़त्म करता है शोधकर्ताओं की माने तो दालचीनी का तेल इ कोली बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम है।

कैसे खाएं 

  • इसे अपने खाने में मसाले की तरह डाल कर खा सकती हैं
  • दालचीनी चाय बना कर पियें। इसके लिए आप दालचीनी की छड़ी को ½ कप पानी में 10 मिनट के लिए उबाल लें और फिर पीएं
  • इससे आपको आंतों के बैक्टीरिया से छुटकारा मिल जाएगा है।

एप्‍पल साइडर विनगर एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करता है।

एप्‍पल साइडर विनगर एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करता है।

यह भी एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करता है। इसे एंटीफंगल,एंटीसेप्टिक गुणों के कारण जाना जाता है जो हमारे शरीर को एल्कालाइज कर देता है।

कैसे खाएं 

  • बैक्टीरिया को और बढ़ने से रोकने के लिए आप 1 चम्मच एप्‍पल साइडर विनगर को गर्म पानी में मिला कर सुबह खली पेट पीएं।
  • यही नहीं इससे आप खुल्ला भी कर सकते हैं जिससे गाला साफ़ रहेगा
  • इसके साथ आप शहद मिला कर भी पी सकते हैं आपको खासी में आराम मिलेगा
  • और अगर आपको चोट लग जाये तो रुई के फैये को एप्‍पल साइडर विनगर में भिगो कर चोट पर लगाएं।

नारियल के तेल में काफी बड़ी मात्रा में कैप्रेलिक

नारियल के तेल में काफी बड़ी मात्रा में कैप्रेलिक

नारियल का तेल 

नारियल के तेल में काफी बड़ी मात्रा में कैप्रेलिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में होने वाले संक्रमण के प्रभाव को कम कर, उसे बढ़ने से रोकता है। यह इंफेक्शन को दूर करने के लिए प्रयोग की जानें वाली दवाओं में भी कैप्रेलिक एसिड ही पाया जाता है। इसलिए नारियल का तेल इसके लिए उपयुक्त माना गया है।

कैसे खाएं 

  • अपना टूथ पेस्ट खुद बनाएं जिसमें नारियल के तेल मिलाएं जिसमें एंटीबायोटिक होता है। नारियल के तेल से आयल पुल्लिंग करें इससे मुँह के बैक्टीरिया ख़त्म हो जाएंगे।

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