Sada Veer

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साडा वीर का है वादा लागत कम मुनाफ़ा ज्यादा

साडा वीरTM के सम्बन्ध  में आम तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न
साडा वीर क्या है और यह किस प्रकार बनता है?

भूमि में जब हम कम्पोस्ट खाद (गोबर ,पत्तियों व अनाजो इत्यादि के अवशेषों से बनी हुई खाद) मिटटी में मिलाते है तब वह पहले जीवाणुओं दुआरा की गई विशेष रासायनिक प्रकिया के फलस्वरूप कार्बनिक अम्लो में पौधे के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व घुले होते है जिनको पौधा ग्रहण करता है यह कार्बनिक अम्ल बहुत थोड़ी ही मात्रा में बन पाते हैं इन्ही कार्बनिक अम्लो का मिश्रण ही साडा वीर हैं यह कार्बनिक अम्ल कोयले की खानों में पाये जाने वाले जेविक पदार्थो से संशेलित किये जाते है
साडा वीर का उपयोग क्यों आवश्यक हैं?
प्रतिदिन रासायनिक उवर्रको के अंधाधुंध प्रयोग से भूमि की उवरा शक्ति कमजोर होती जा रही है तथा कुछ क्षेत्रों में भूमि बंजर होने की कगार पर पहुच चुकी है जिसके परिणाम स्वरुप फसल उत्पादन में कमी आ रही है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है इन सब दुष्प्रभावों को देखते हुए विकसित देशो जैसे अमेरिका,यूरोप,ऑस्टेलिया,चीन आदि में रासायनिक उवर्रको का प्रयोग सीमित कर दिया गया है तथा जैविक उवर्रको के प्रयोग को बढावा दिया जा रहा है जिसके परिणाम स्वरुप वहां प्रति एकड उपज में वृद्धि हो रही है  तथा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ,अनाज ,सब्जिया व फल उत्पादित हो रहे हैं 
वही हमारे देश में प्रति एकड अनाज व सब्जियों की उपज विश्व में सबसे कम है तथा उत्पादित अनाजों ,सब्जियों,फलों में पोषक तत्वों का अभाव पाया गया है व बहुत अधिक मात्रा  में कीटनाशको के अवशेष पाये गये हैं जिस कारण हमारे कृषि उत्पादों को विश्व में अनेक देशों दुआरा प्रतिबन्धित किया जा चुका है   इन हालातों को देखते हुए नुट्रीकेयर बायो साइंस ने जैविक उपज वृधि कारक उत्पाद  साडा वीर नाम से भारतीय  किसानों के लिए उपलब्ध करवाया है जिसके उपयोग से फसल में उपज वृद्धि होती है तथा रासायनिक उवर्रक व कीटनाशको  के प्रयोग में कमी आती है तथा स्वास्थ्य की द्रष्टि से उत्तम उत्पादन प्राप्त होता है
साडावीर  किस प्रकार उपज की वृद्धि करता है ?
साडा वीर प्रयोग करने से पौधे के सभी अंगो जैसे जड़,तने इत्यादि में वृद्धि होती है, जिससे फल व फूल अधिक मात्रा में उत्पादित होते है जिसके परिणाम स्वरुप फसल उत्पादन में वृद्धि होती हैं 
साडा वीर का कोई दुष्प्रभाव तो नहीं है ?
साडा वीर जेविक उवर्रक होने के कारण फसलों में इसका प्रयोग करने से कोई हानिकारक अवशिस्ट पदार्थ नहीं बचता है अत: फसलों में इसका प्रयोग पर्यावरण एवं मनुष्यो के लिए सुरिक्षित है?
साडा  वीर का प्रयोग किस प्रकार से किया जा सकता है ?
साडा वीर का उपयोग स्प्रे में ,मिट्टी में उवर्रको के साथ मिलकर व सिचाई के पानी के साथ भी किया जा सकता है
साडा वीर का उपयोग मंहगा तो नहीं है ? क्या इसके उपयोग से कृषि की लागत तो नहीं बढ़ेगी?

अनेक किसान भाइयो को अनुभव है कि साडा वीर का प्रयोग करने से एन.पी.के. , डी.ए.पी.
, यूरिया जैसे मंहगे उवर्रकों की आधी मात्रा ही पर्याप्त होती है तथा पानी भी कम लगाना पड़ता है जिससे लागत काफी कम हो जाती है तथा फसल का उत्पाद भी अधिक प्राप्त होता है इसलिये कहा है कि “साडा वीर का ये है वादा ,लागत कम मुनाफ़ा ज्यादा” साडा वीर का प्रयोग करने वाले सभी किसान भाइयो का मत है कि साडा वीर अपना वादा निभाने में पूरी तरह सफल हैं
साडा वीर की इतनी कम मात्रा ही किस प्रकार कारगर है तथा यह बड़े बैगो में क्यों नहीं उपलब्ध है ?
इसको इस प्रकार समझ सकते है, जब हम भोजन करते है तब शरीर  द्वारा आवश्यक पोषक तत्व भोजन से संसेलित कर बाकी का कचरा मल द्वारा निकाल दिया जाता है  उसी प्रकार कई टन कम्पोस्ट खाद से कुल किलो मात्रा में ही पौधे के लिए आवश्यक कार्बनिक अम्ल बनते है,बाकि  बचा हुआ पदार्थ मिटटी में बदल जाता है साडावीर इन्ही संश्लेषित  कार्बनिक अम्लों से बना है अत: कम मात्रा ही पर्याप्त  है 
साडा वीर में केवल सक्रीय तत्व  ही उपस्थित  हैं इसमें वजन व मात्रा बढाने के लिए किसी भी निष्क्रिय पदार्थ को नहीं मिलाया गया है अत : यह छोटी पैकिग में ही पर्याप्त  है 
साडा वीर का उपयोग कब और कितनी बार करना चाहिए? 

साडा वीर TM का है ये वादा ,लागत कम ,मुनाफ़ा ज्यादा
आइये देखे साडा वीर कैसे निभाये अपना वादा;

•    करे अंकुरण में वृद्धि
आपके बीज का एक- एक  दाना कीमती है साडा वीर  से बीज उपचारित  करने से 10 से 15 प्रतिशत  तक अंकुरण बढ़ जाता है 
•    करे जड़ो का विकास 
बुवाई के साथ  इसका प्रयोग करने से पौधे की जड़े लम्बी घनी एवं मजबूत होती है  जिससे पौधा जमीन से अधिक पोषण प्राप्त करता है तथा मजबूती के साथ खड़ा रहता है 
•    करे पैदा ज्यादा मात्रा में व मजबूत किल्ले:-
किल्ले निकलते समय यूरिया में मिलाकर लगाये या स्प्रे करने  से किल्लो की संख्या बढ़ जाती है व स्वस्थ  एवं मजबूत किल्ले  पैदा होते है 
•    बढाये फल व फूल:-
फल व फूल आने से पहले स्प्रे करे या यूरिया में मिलाकर या किसी अन्य प्रकार से मिटटी में लगायें इससे फल-फूल की वृद्धि होती है फल व दाने आकार  में बड़े व वजनदार और चमकदार  पैदा होते हैं
•    बढाये फसल की अन्दरूनी ताकत:
फसल के लिए टॉनिक का कार्य करता है इसके उपयोग करने से बीमारी लगने व कीड़े लगने की सभावना कम हो जाती है 
•    रोके मिटटी को खुश्क होने से :
यह प्राकर्तिक पदार्थो से बना होने के कारण Soil conditioner की तरह कार्य करता है जिससे मिटटी में नमी अधिक समय तक बनी रहती है 
•    बचाये यूरिया एन.पी.के. , डी.ए. पी. :
खेतो में लगने वाली नाईट्रोजन की लगभग 35 प्रतिशत तक मात्रा हवा व धूप से नष्ट हो जाती है जो पौधे के काम नहीं आ पाती साडावीर  उस मात्रा को नष्ट  होने से बचाता है जिससे नाईट्रोजन  की उपलब्धता  अधिक समय तक बनी रहती है 
•    बढाये जमीन के पोषक तत्वों की उपलब्धता:
यू तो जमीन में पोषक तत्वों की पहले से ही कमी है किन्तु जो सूछम पोषक तत्व उपस्थित भी हैं उनको पौधा Non Chleated Form में होने के कारण ग्रहण नहीं कर पाते साडा वीर  भूमि में उपस्थित सूखम तत्वों को चिलेटीड  करता है जिससे वे पौधे दुआरा ग्रहण करने योग्य हो जाते है इसके अतिरिक्त साडा वीर  में भी सुचम पोषक तत्व उपस्थित है

            उपयोग विधि एवं मात्रा
उवर्रको  जैसे यूरिया ,एन.पी.के. व  डी.ए. पी. में मिलाकर: एक पैकेट  साडा वीर (500 ग्राम) को 100 मिली(एक कप ) उवर्रक में 1 किलो की दर से साडावीर मिलाये तथा उवर्रक की मात्रा 50 प्रतिशत तक कम कर दे

स्प्रे दुआरा: 20 से 35 ग्राम से एक स्प्रे टैंक(15ली०) पानी में घोल कर व छान कर प्रयोग करे बैगन ,टमाटर ,मिर्च ,तुरई ,करेला,पेठा,मेंथा  इत्यादि नाजुक फसलो में 10 से 20 ग्राम  तथा धान ,गेहू ,गन्ना इत्यादि फसलो  में 20 से 30  ग्राम प्रति टैंक  (15 ली०) पानी में मिलाये

सिचाई के साथ : ड्रिप सिचाई व स्प्रिकलर में मिलाकर इसका प्रयोग कर सकते है मात्र 500 ग्राम से 1 किलो प्रति एकड़ 

बीज उपचार: 10 ली० पानी मई 10 ग्राम का घोल बना ले तथा उसमे बीज को 8 से 15 घंटे भिगो कर प्रयोग करे 

अन्य विधि: इसको मिटटी ,रेत एवं बीज में मिलाकर भी प्रयोग कर सकते है