दमा व श्वास का घरेलू उपचार
प्राकृतिक उपायों से पाएं असाध्य दमा और अन्य बीमारियों से राहत

प्राकृतिक चिकित्सा में केले, काली मिर्च, अमलतास और अन्य जड़ी-बूटियों का उपयोग प्राचीन काल से किया जाता रहा है। इनका सही तरीके से सेवन करने से कई बीमारियों में अद्भुत लाभ मिलते हैं। आइए जानते हैं कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में जो असाध्य दमा, फेफड़ों की सफाई और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में मददगार साबित हो सकते हैं।


1. केला और काली मिर्च से दमा का इलाज

केला और काली मिर्च का यह उपचार फेफड़ों की सफाई कर, दमा से राहत दिलाने में सहायक होता है।

एक पका हुआ केला लें और उसे छीलकर लंबाई में चीर दें।
इसमें 2 ग्राम कपड़छान की हुई काली मिर्च भरें।
अब इसे केले के पत्ते में अच्छी तरह लपेटकर धागे से बांध दें और 2-3 घंटे के लिए रख दें।
इसके बाद केले के पत्ते सहित इसे आग में भूनें, जब तक कि पत्ते जल न जाएं।
ठंडा होने पर केले का छिलका हटा दें और केला खा लें।
सुबह काली मिर्च भरकर रखें और शाम को भूनकर सेवन करें।
15-20 दिन के सेवन से लाभ मिलना शुरू हो जाता है।


2. केले के पत्तों की राख से दमा और सांस संबंधी समस्याओं का इलाज

केले के पत्तों से बनी राख अस्थमा और फेफड़ों की समस्याओं में बेहद असरदार होती है।

केले के सूखे पत्तों को किसी बड़े बर्तन में जलाकर राख बना लें।
इसे कपड़छान कर किसी साफ कांच की शीशी या डिब्बे में स्टोर करें।
सेवन विधि:

  • एक साल पुराना गुड़ (3 ग्राम) लें।

  • चिकनी सुपारी का आधा से थोड़ा कम वजन लें और 2-3 चम्मच पानी में भिगो दें।

  • इसमें ¼ (एक चौथाई) चम्मच केले के पत्ते की राख डालें।

  • 5-10 मिनट बाद इस मिश्रण का सेवन करें।

  • दिन में सिर्फ एक बार ही लेना है, कभी भी सेवन किया जा सकता है।


3. बच्चों के असाध्य दमा का इलाज - अमलतास का प्रयोग

अमलतास का गूदा फेफड़ों की सफाई करता है और बलगम को निकालने में मदद करता है।

15 ग्राम अमलतास का गूदा लें और इसे 2 कप पानी में डालकर उबालें।
जब यह मिश्रण उबलकर ¼ (चौथाई) भाग रह जाए, तो इसे छान लें।
रोगी को सोने से पहले यह गर्म-गर्म मिश्रण पिलाएं।
यह फेफड़ों में जमा बलगम को शौच मार्ग से बाहर निकालने में मदद करता है।
3 दिन तक लगातार सेवन करने से जमा हुआ कफ पूरी तरह निकल जाता है।
महीने भर नियमित सेवन करने से फेफड़ों की सफाई होती है और तपेदिक जैसी गंभीर समस्याओं में भी लाभ मिलता है।


अन्य महत्वपूर्ण घरेलू उपाय:

हल्दी और शहद:

  • हल्दी पाउडर में शहद मिलाकर लेने से अस्थमा और सांस की तकलीफ में आराम मिलता है।

अदरक और तुलसी:

  • अदरक के रस में तुलसी का रस मिलाकर पीने से दमा के लक्षण कम होते हैं।

लहसुन और दूध:

  • लहसुन की 2-3 कलियां गर्म दूध के साथ लेने से सांस की नलियों की रुकावट कम होती है।

मेथी के बीज:

  • मेथी के बीजों को रातभर पानी में भिगोकर सुबह पीने से शरीर में जमे टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और फेफड़ों की सफाई होती है।


सावधानियां:
  • इन उपायों को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

  • यदि कोई गंभीर एलर्जी हो, तो तुरंत सेवन बंद कर दें।

  • प्राकृतिक उपचार धीरे-धीरे असर करते हैं, इसलिए धैर्य रखें और नियमित रूप से पालन करें।


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