
योगज्ञान - भारतीय योग की गूढ़ विद्या
योग: आत्मा और परमात्मा के मिलन का विज्ञान
योग की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘युज’ से हुई है, जिसका अर्थ है "जोड़ना"। यह आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक, आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति का विज्ञान है।
योग के प्रकार
भगवान कृष्ण ने योग के तीन प्रमुख प्रकार बताए हैं:
✔ ज्ञान योग - ज्ञान और विवेक का मार्ग
✔ कर्म योग - निष्काम कर्म की साधना
✔ भक्ति योग - प्रेम और समर्पण का मार्ग
इसके अलावा योग प्रदीप में बताए गए 10 योग प्रकार भी महत्वपूर्ण हैं, जिनमें राज योग, हठ योग, ध्यान योग और मंत्र योग प्रमुख हैं।
आष्टांग योग: संपूर्ण जीवन दर्शन
महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित आष्टांग योग योग का पूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसके आठ अंग हैं:
🔹 यम - नैतिक नियम (सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य आदि)
🔹 नियम - आत्म-अनुशासन (शौच, संतोष, तप आदि)
🔹 आसन - शरीर को स्वस्थ और संतुलित करने की प्रक्रिया
🔹 प्राणायाम - श्वास नियंत्रण द्वारा ऊर्जा संचय
🔹 प्रत्याहार - इंद्रियों को विषयों से हटाना
🔹 धारणा - ध्यान को केंद्रित करना
🔹 ध्यान - ध्यान और एकाग्रता
🔹 समाधि - आत्मा का परमात्मा में लीन हो जाना
योग का संक्षिप्त इतिहास
योग का उल्लेख वेदों और उपनिषदों में मिलता है। भारतीय इतिहास में यह विद्या हजारों वर्षों से चली आ रही है। महर्षि पतंजलि ने योग को सुव्यवस्थित रूप से "योगसूत्र" के रूप में संकलित किया, जो आज भी योग का मूल आधार है।
योग ग्रंथ और पौराणिक प्रमाण
वेद, उपनिषद्, भगवद गीता, हठ योग प्रदीपिका, शिव संहिता और अन्य तंत्र ग्रंथों में योग का विस्तार से वर्णन मिलता है।
हमारी वेबसाइट पर क्या मिलेगा?
✅ योग का प्राचीन और आधुनिक इतिहास
✅ विभिन्न योग प्रकार और उनकी विधियाँ
✅ आष्टांग योग का विस्तृत विवरण
✅ योग ग्रंथों से उद्धरण और गहरी जानकारी
✅ योगाभ्यास से होने वाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ
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